तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने आधे रांची शहर की बिजली गुल कर दी। पेड़ की डाल टूटकर और उड़कर हजारों वोल्ट तार पर गिर गई। इससे घंटों बिजली आपूर्ति ठप रही। हालांकि दोपहर में बारिश शुरू होते ही सुरक्षा के दृष्टिकोण से सभी सबस्टेशनों से बिजली बंद कर दी गई। बारिश के बाद जैसे ही सभी फीडरों को एक-एक चालू करना शुरू किया गया, वैसे ही तकनीकी समस्या की सूचना आ गई। जिस ठीक करने में घंटों लगे। इसके बाद भी कई जगहों पर शाम 7 बजे तक तकनीकी खराबी के कारण बिजली बंद रही। शाम हो जाने के कारण बड़े इलाके में अंधेरा पसरा रहा।
33 केवी नामकुम-कुसई लाइन में पेड़ की डाल गिर गई थी। इससे एक फेज शार्ट सर्किट हो गया और बड़े इलाके में बिजली गुल हो गई। आधे घंटे तक दुरुस्त करने का प्रयास किया गया। इसके बाद एयरपोर्ट लाइन को तुपुदाना और कुसई लाइन को अरगोड़ा लाइन से वैकल्पिक स्रोत के रूप में लाइन देकर बिजली बहाल की गई। वहीं, कोकर लाइन में भी खराबी आ गई थी। ग्रिड में जंपर कटने से पूरे कोकर की लाइन बंद हो गई। इसे एक-दो घंटे के बाद दुरुस्त किया जा सका। वहीं चुटिया पावर हाउस से भी बड़े इलाके में शाम सात बजे तक बिजली बाधित रही।
इधर...आंधी में जरूरत से कम बिजली का हुआ उपयाेग, 81 मेगावाट बिजली सरेंडर कर दी गई
तेज हवाएं और खराब माैसम के कारण साेमवार काे उपलब्धता के बावजूद बिजली की आपूर्ति नहीं हाे सकी। बिजली अधिकारियाें ने बताया कि साेमवार काे राज्य में बिजली की कमी नहीं थी। दिन में लगभग 900 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी, जबकि मांग 800 से कुछ अधिक की थी। ऐसे में 81 मेगावाट बिजली सरेंडर हुई। रांची में 230 मेगावाट बिजली की डिमांड थी, जिसकी पूरी आपूर्ति की गई। वहीं, ऊर्जा निगम काे तेनुघाट उत्पादन केंद्र से 158, सीपीपी से 21, इनलैंड पावर से 52, केंद्रीय इकाइयाें से 639 मेगावाट बिजली मिल रही थी। इसके अलावा फ्रिक्वेंसी अच्छी हाेने के कारण हम 1150 मेगावाट तक बिजली ले सकते थे, पर मांग कम हाेने के कारण इसकी जरूरत नहीं पड़ी।
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