अनिता गुप्ता, बच्चे के जन्म लेने के बाद कई बार उसके लिंग का पता नहीं चलता कि वह लड़का है या लड़की। ऐसे बच्चे के माता-पिता भी उसके भविष्य को लेकर असमंजस में रहते हैं। बच्चा बड़ा होने लगता है तो अन्य बच्चों की तुलना में उसका व्यवहार अलग दिखता है। दूसरे बच्चे से वह दूरियां बनाने लगता है। समाज उसे अलग नजर से देखने लगता है। ऐसे बच्चों को नई जिंदगी देने के लिए रिम्स ने लिंग परिवर्तन की ओर कदम बढ़ाया है। जून से रिम्स के पीडियाट्रिक और जेनेटिक विभाग के चिकित्सक बच्चे के वास्तविक क्रोमोजोम की पहचान कर उसके लिंग का निर्धारण करेंगे।
उसे वास्तविक स्वरूप देंगे, जिससे बच्चा सामान्य हो जाए। रिम्स के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ अभिषेक रंजन ने बताया कि ऐसे बच्चे में जेनाइटल ही नहीं दिखता, जिससे पता चले कि वह लड़का या लड़की। बच्चा आधा लड़की की तरह और आधा लड़के की तरह होता है। इसका इलाज रिम्स में संभव है। इसके लिए अब बाहर जाने की जरूरत नहीं है। रिम्स में ऐसे बच्चों का इलाज नि:शुल्क होगा। अभिभावक ऐसे बच्चों का इलाज जल्द कराएं। कम उम्र में बच्चे के जीन के मुताबिक उसके लिंग का परिवर्तन हो जाएगा। बड़े हो जाने पर कई बच्चे उसी को अपना लेते हैं और वैसे ही जीना चाहते हैं।
कॉन्जेनाइटल एड्रेनल हाइपर प्लासिया
बच्चे में एड्रेनल हार्मोन के काम नहीं करने के कारण उसकी बॉडी में टेस्ट्रौन ठीक से नहीं बन पाता है। जिससे लिंग का विकास नहीं होता। ऐसा ज्यादातर बच्चियों में होता है। बच्ची का इंटर्नल पार्ट स्त्री का और एक्सटर्नल पार्ट पुरुष का होता है। यानि बच्ची में यूट्रस, ओवरी भी होता है, लेकिन एक्सटर्नल जनेटिलिया पुरुष जैसे होता है। ऐसे में एक्सटर्नल पार्ट की सर्जरी कर पुरुष जननांग हटाकर स्त्री जननांग बनाया जाएगा।
कंप्लीट एंड्रोजन इंसेंसैटिविटी सिंड्रोम
ये बीमारी लड़कों में पाई जाती है। इसमें लड़का का पूरा एक्सटर्नल पार्ट पुरुष जैसे होता है, लेकिन वह जेनेटिकली फीमेल की तरह बर्ताव करता है। ऐसे में चिकित्सक उसकी काउंसलिंग करेंगे। यदि लड़का पूरी तरह से लड़का बनना चाहता है तो मनोचिकित्सक की सहायता से ठीक किया जाएगा। अन्यथा लड़का यदि अपने स्वभाव के अनुरूप लड़की बनना चाहता है तो उसके अंदरुनी हिस्से की सर्जरी कर लड़की बना दिया जाएगा।
सर्जरी से पहले जेनेटिक टेस्ट के बाद बच्चे और अभिभावक की काउंसलिंग
डॉ अभिषेक ने बताया कि बच्चे कि सर्जरी से पहले उसका जेनेटिक टेस्ट होगा। टेस्ट के बाद जेनेटिक लैब बताएगा कि बच्चे के सेल की रचना क्या है? बच्चा पुरुष है या स्त्री। इसके बाद बच्चे और माता-पिता की काउंसलिंग होगी। उनकी इच्छा पर सर्जरी करके बच्चे का लिंग परिवर्तन किया जाएगा।
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