राजीव गोस्वामी, कोरोना के कहर ने रांची के ऑटो चालकों की कमर तोड़ दी है। लॉकडाउन के दौरान 3 महीने से अधिक समय तक ऑटो का परिचालन बंद रहा, अब शुरू भी हुआ तो पहले की तरह सवारी नहीं मिल रही कि घर चलाने भर की भी कमाई हो सके। ऐसे में कई ऑटो चालक अपना पेशा बदल चुके हैं। टैगोर हिल के पास रहने वाले अरविंद ने 6 महीने पहले ही बैंक से लोन लेकर ऑटो खरीदा था। लेकिन इसके एक महीने के बाद ही लॉकडाउन हो गया।
ऑटो चलना बंद हो गया। अब बैंक का कर्ज वापस करने के लिए मोरहाबादी में आकर ऑटो से सब्जी बेच रहे हैं। कहते हैं, अगर सब्जी नहीं बेचेंगे तो ऑटो भी बिक जाएगा। क्योकि बैंक का ईएमआई देना है। इनकी ही तरह बोड़ैया के रहने वाले महेंद्र भी ऑटो से सब्जी बेच रहे हैं। कहते हैं पैसेंजर कहां मिल रहे हैं। ऑटो चलाकर तेल का पैसा निकलना भी मुश्किल हो गया था। ऐसे में पेशा बदलने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नजर नहीं आ रहा था। इनकी तरह हजारों ऑटो चालक इन दिनों सब्जी बेच रहे हैं। धुर्वा क्षेत्र के सैकड़ो ऑटो चालक परिवार पालने के लिए राजमिस्त्री या मजदूरी का काम कर रहे हैं।
बड़ी चिंता... शहर की सड़कों पर दौड़ रहे आधे से अधिक ऑटो बैंक से लोन पर हैं, नहीं कमाएंगे तो कैसे भरेंगे कर्ज
परेशानी... कमाई ही नहीं तो कैसे चुकाएंगे टैक्स
रांची में 3 महीने से अधिक समय तक ऑटो का परिचालन पूरी तरह बंद रहा। अब ऑटो चालकों को टैक्स देने की चिंता सताने लगी है। ऑटो चालकों का कहना है कि इतने दिनों तक ऑटो बंद रहे, अब चल भी रहे तो सवारी नहीं मिल रही, ऐसे में हम 4000-5000 रुपए सालाना टैक्स कैसे चुकाएं। सरकार सबको राहत दे रही है। लेकिन ऑटो चालकों की तरफ ध्यान नहीं है।
कौन सुनेगा दर्द... पैसेंजर के लिए घंटों करना पड़ रहा इंतजार
कोरोना काल में स्थिति ऐसी बदली है कि ऑटो चालकों को पैसेंजर के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। नए नियम के अनुसार छोटे ऑटो में मात्र दो और बड़े में चार पैसेंजर बैठाने की अनुमति है। इस वजह से एक ट्रिप में ऑटो चालकों को 50 से ₹60 रु. ही कमाई हो रही है। इससे पहले 5-8 पैसेंजर ऑटो चालक बैठाते थे और एक ट्रिप में डेढ़ सौ से 200 तक की कमाई हो जाती थी।
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