शिक्षकों का रोस्टर सिस्टम हटाकर अब सामाजिक दूरी का पालन करते हुए पढ़ाई करानी चाहिए। शिक्षक अपने विवेक से सुबह-शाम बच्चों के घर जाकर बच्चाें का अध्यापन कराएं, ताकि पता चले कि उनका शैक्षिक स्तर कैसा है? उक्त बातें शिक्षा मंत्री जगरनाथ महताे ने कहीं। वे गुरुवार काे विशेष वेबिनार काे संबाेधित कर रहे थे। काेविड-19 के कारण स्कूल बंद हैं और ऐसे में भी शिक्षण और साप्ताहिक आकलन जरूरी है।
उन्हाेंने कहा कि पहले यह क्लियर होना चाहिए कि सिलेबस में कितना कटौती किया जा रहा है। वेबिनार से सिर्फ संदेश ही नहीं कार्य को धरातल पर लाने का प्रयास हाेना चाहिए। चतरा उपायुक्त दिव्यांशु झा ने कहा कि हर शिक्षक कम से कम 10 वैसे छात्रों के घर जाएं, जिसके घर स्मार्ट फोन नहीं है। उन्हें वे एजुकेशनल कंटेंट दें और उसका आकलन करें। वेबिनार में धनबाद से डीईओ प्रबला खेस, डीएसई इंद्रभूषण सिंह, एडीपीओ विजय कुमार आदि शामिल थे।
बच्चाें की माॅनिटरिंग के लिए बन रहा एप: सचिव
माध्यमिक शिक्षा निदेशक जटाशंकर चाैधरी ने कहा कि 35 हजार टैब के माध्यम से हम करीब 3 लाख 50 हजार छात्रों तक डीजी-साथ का ऑनलाइन टेस्ट कराया जा सकता है। जेईपीसी के राज्य परियोजना निदेशक शैलेश कुमार चाैरसिया ने कहा कि पंचायत स्तर पर जितने भी कार्यरत कर्मचारी हैं, उनका विद्यालय प्रबंधन समिति से सामंजस्य बना कर इसे और व्यापक रूप दें। विभागीय सचिव राहुल शर्मा ने कहा कि अभी 9-12 वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए विद्यालय खोलने की बात चल रही है। प्राथमिक स्तर पर एप बनाया जा रहा है, जिससे एक-एक बच्चे का मॉनिटरिंग की जा सके।
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