पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के फर्जीवाड़े में जांच रिपोर्ट सौंपने के आठ महीने बाद बुधवार को आदिवासी कल्याण आयुक्त हर्ष मंगला ने आठ राज्यों के 45 संस्थानों को ब्लैकलिस्टेड कर दिया। जिला कल्याण पदाधिकारियों को भुगतान स्थगित करने का निर्देश दिया गया है। जहां भुगतान हुआ होगा, वहां पर उसकी वसूली की जाएगी और साथ में प्राथमिकी भी दर्ज होगी। इनमें विशाखापत्तनम के वे संस्थान भी हैं, जिनके बारे में 3 नवंबर को दैनिक भास्कर ने खबर छापी थी।
ये सारे संस्थान फर्जी पाए गए हैं। कुछ अन्य संस्थानों को शो-कॉज भेजा गया है। हर्ष मंगला ने कहा कि आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, प. बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और हरियाणा के कुल 45 शिक्षण संस्थानों को ब्लैक लिस्ट किया गया है।
इन फर्जी संस्थानों ने अयोग्य छात्रों से साठ-गांठ कर गलत तथ्य देते हुए स्कॉलरशिप का आवेदन दिया था। फर्जीवाड़े में शामिल ऐसे 543 छात्रों की पहचान हुई है। भौतिक सत्यापन के दौरान एक-दो कमरे के घरों पर इन शैक्षणिक संस्थानों के नाम के सिर्फ बोर्ड टंगे पाए गए थे। लेकिन, वहां पढ़ाई नहीं होती थी।
बाहर के 117 संस्थानों का हुआ था भौतिक सत्यापन
वित्तीय वर्ष 2019-20 में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आए आवेदनों के बाद कल्याण विभाग ने एक जांच दल बनाकर 8 राज्यों के 117 संस्थानों का फिजिकल वेरिफिकेशन कराया था। 3 फरवरी 24 फरवरी और 17 मार्च 2020 को जांच दल ने अपनी रिपोर्ट आदिवासी कल्याण आयुक्त को सौंपी थी। इनमें से 45 संस्थानों को शो कॉज किया गया। इन सभी संस्थानों को दोषी पाया गया, इन्हें काली सूची में डालने व नाम पोर्टल से हटाने का निर्णय लिया गया।
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