विधानसभा स्पीकर रबींद्रनाथ महतो बुधवार काे गुजरात के केवाडिया में अखिल भारतीय पीठासीन पदाधिकारियों के 80वें सम्मेलन में सशक्त लोकतंत्र हेतु विधायिका कार्यपालिका एवं न्यायपालिका का आदर्श समन्वय विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राज्य के तीनों अंगों कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका देश की जनता के कल्याण के उद्देश्य से बनायी गई है। इससे जन कल्याण तभी संभव हो पायेगा, जब ये तीनों संस्थाएं आपस में मिल-जुलकर कार्य करें।
एक-दूसरे के क्षेत्राधिकार का सम्मान करें। लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में राज्य के तीनों अंगों विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के बीच का समन्वय अत्यन्त महत्वपूर्ण है। क्योंकि अध्यक्षीय प्रणालियों की तरह संसदीय लोकतंत्र में सत्ता के विकेंद्रीकरण का सिद्धांत अथवा सेपरेशन ऑफ पावर पूर्णतः लागू नहीं होता है। स्पीकर ने कहा कि जैसे सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालय के न्याय निर्णयों की समीक्षा विधायिका द्वारा नहीं की जा सकती है। उसी प्रकार सदन में पीठासीन पदाधिकारी के कार्यों को न्यायिक समीक्षा से दूर रखा गया है।
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